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पति बाहर ससुर का लंड बहू के अंदर – 2

"Sasur bahu ki sex story:- पिछले पार्ट में आपने पढ़ा, कि कोमल, जोकि एक 23 साल की जवान औरत है, उसका पति बाहर रहता है और वह अकेली अपने ससुर के साथ रहती है। कोमल अपने पति के बिना से..."

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Published on July 26, 2026
पति बाहर ससुर का लंड बहू के अंदर – 2
Sasur bahu ki sex story:- पिछले पार्ट में आपने पढ़ा, कि कोमल, जोकि एक 23 साल की जवान औरत है, उसका पति बाहर रहता है और वह अकेली अपने ससुर के साथ रहती है। कोमल अपने पति के बिना सेक्स की प्यासी है और वह अपने ससुर से बहुत खुल जाती है। उसका ससुर भी उसे चोदने के चक्कर में है और रात में उसके कमरे में ही सोता है, लेकिन अभी तक दोनों एक दूसरे से इतने नहीं खुले है कि चुदाई हो सके, तो अब आगे क्या होगा पढ़िए इस भाग में। पिछले पार्ट यदि आपने नहीं पढ़ा है तो यहाँ पढ़ सकते है =>> पति बाहर ससुर का लंड बहू के अंदर – 1 Sasur bahu ki sex story hindi chudai kahani शेर सिंह – देसाई। दिल करता है लंड बाहर निकाल के तेरी बहु की गांड और नंगी कमर देखते हुवे मुठ मारू। मै – पागल हो गया है तू? यहाँ मुठ मारेगा? शेर सिंह – हाँ। तूने तो बहुत मज़े लिए हैं अब मुझे उसकी गांड का मज़ा लेने दे। इससे पहले मैं कुछ कह पाता शेर सिंह ने अपना विशाल लंड बाहर निकाल लिया और स्किन ऊपर नीचे रगड़ने लगा। मेरे सामने मेरी बहु को देखकर एक पडोसी मुठ मार रहा था। मुझे ये बात सोच कर ही इरेक्शन होने लगा। मैंने देखा शेर सिंह का लंड बहुत बड़ा था और उसमे से काफी स्मेल आ रही थी, ऐसा लग रहा था जैसे उसके लंड की स्मेल पुरे कमरे में फ़ैल जाएगी। थोड़ी देर में शेर सिंह के लंड का पानी सोफे और टेबल पे निकल आया। शेर सिंह को मैंने बहु की ब्रा ला के दी तब उसने अपना माल साफ़ किया। बहु आयी और बोली। कोमल – बाबूजी यहाँ कुछ अजीब सी स्मेल आ रही है? शेर सिंह – बेटा मेरे हाथ से आ रहा होगा। (शेर सिंह जिस हाथ से अपना लंड मसल रहा था। उसी हाथ को बहु की नाक के पास लगा दिया)। कोमल – हाँ अंकल आपके हाथ में से ही ये स्मेल आ रही है। किस चीज़ की स्मेल है? अजीब सी है कुछ जानी पहचानी भी। लेकिन स्मेल अच्छी है। शेर सिंह – बेटा ये स्मेल मेरी फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाले केमिकल की है। तुम्हे अच्छा लगा है तो तुम रोज मेरा हाथ स्मेल कर सकती हो। कोमल – ओके अंकल। बहु को शेर सिंह के लंड की महक लेते देख, मेरा लंड फड़कने लगा। लंच करते वक़्त मैंने भी टेबल के नीचे एक हाथ से लंड निकाला और बहु के टाइट ब्लाउज में चूचि देख मुठ मारने लगा और वहीं फर्श पे अपना पानी निकाल दिया। सुबह से बहु मेरा और शेर सिंह दोनों के लंड का पानी निकाल चुकी थी। शाम को बहु रेड कलर की साड़ी पहने किचन में बर्तन धो रही थी। मैं किचन में उसके पीछे एक टीशर्ट और लोवर पहने चाय की प्याली लिए खड़ा बहु से बातें कर रहा था। Sasur bahu ki sex story कोमल – (अपनी साड़ी के पल्लू को कमर में कसती हुई बोली) – बाबूजी! आज रात शेर सिंह अंकल यहीं रुकेंगे? मैं – हाँ बहु। कोमल – ओके। अगर ऐसा है तो मैं आपका कमरा ठीक कर देती हूँ उनको वहीँ कमरे में सोने दीजिये और आप मेरे कमरे में सो जाइये। मैं – ठीक है बहु जैसा तुम्हे ठीक लगे। कोमल – कमरा थोड़ा साफ़ करना पड़ेगा। चीज़ें बिखरी पड़ी हैं बहुत दिन से हम लोगों ने साफ़ नहीं किया। मैंने बर्तन धो लिए हैं, आप अगर मेरी थोड़ी सी मदद कर दें तो मैं जल्दी से कमरा साफ़ कर दूँगी। मैं – (बहु की खुली चिकनी कमर को देखते हुवे) हाँ बहु क्यों नहीं। किचन से निकल कर मैं और बहु मेरे कमरे में जाते हैं और बिखरे पड़े सामान को ठीक करने लगते हैं। कोमल – बाबूजी! यहाँ रखे पुराने सामान को मैं ऊपर वुडेन कवर में रख देती हूँ बहुत सारा स्पेस हो जायेगा कमरे में। मैं – हाँ बहु रुको मैं कोई चेयर लगाता हूँ जिसपे तुम चढ़ के सामान रख सको। कोमल – अच्छा बाबूजी। मैं डाइनिंग हॉल से एक प्लास्टिक की चेयर लाया और कमरे में बेड के पास लगा दी। मैं – बहु तुम इस चेयर पे चढ़ जाओ और बॉक्स ऊपर रख दो और संभल के चढ़ना बेटी। कोमल – जी बाबूजी। बहु ने एक बार फिर अपनी साड़ी के पल्लू को अपनी कमर में बाँधा और अपनी पूरी तरह से खुली नाभि को बेशर्मी से दिखाती हुई चेयर पे चढ़ गई। कोमल – बाबूजी। मुझे होल्ड करिये मैं गिर जाउंगी, मैं कोशिश करती हूँ बॉक्स को ऊपर डालने का। मैं बहु के बिलकुल सामने था उसकी नाभि मेरे फेस के पास थी। मैंने अपने दोनों हाथों से बहु की बड़ी सी गांड को घेर लिया और अपनी हथेली से बहु की नरम मुलायम गांड को साड़ी के ऊपर से दबा दिया। बहु – आह बाबूजी। थोड़ा ऊपर को कीजिये मेरा हाथ लगभग पहुंच गया है। Sasur bahu ki chudai ki kahani मैंने बहु की बड़ी गांड को कस के दबाते हुवे ऊपर उठा दिया और अपना फेस बहु के डीप सॉफ्ट नाभि में चिपका लिया। मेरे गाल और होठ बहु की नाभि से टच हो रहे थे। मैंने बहाने से अपने होठ बहु की नाभि पे रगड़ दिए। अभी 2 मिनट ही हुवे थे कि तभी पावर कट हो गया। शाम हो चुकी थे और इस वजह से कमरे में अँधेरा छा गया। कोमल – हो गया बाबूजी अब मुझे धीरे से नीचे उतारिये प्लीज। मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा। मैं – ठीक है बहु। (कहते हुवे मैंने हाथ के घेरे को ढीला किया और बहु को नीचे आने दिया। )। अँधेरे में मैं अपने हाथ धीरे-धीरे बहु की गांड से होते हुवे। उसकी नंगी कमर को महसूस कर पा रहा था। सामने के तरफ मेरा फेस उसकी नाभि से होता हुवा अब उसके बूब्स के काफी करीब आ चुका था। नीचे आते वक़्त बहु के घुटने से मेरा लोवर और अंडरवियर नीचे की तरफ खिंच गया और मेरा खड़ा लंड पूरी तरह से बाहर निकल आया। इससे पहले के मैं संभल पाता बहु चेयर से उतरते ही अपना बैलेंस खो बैठी और जमीन पे झुकते ही उसके नरम होठ मेरे लंड से कस के रगड़ खा गए। मैंने अँधेरे में उसके गीले होठ को साफ़ अपने लंड पे महसूस किया… मैंने बिना कोई मौका गवाए अँधेरे का फ़ायदा उठाते हुवे जानबूझ कर बैलेंस खोने का नाटक किया और एक हाथ से लंड का स्किन नीचे खोल बहु के मुँह में डाल दिया। बहु की गरम सांस और मुँह के अंदर के लार का स्पर्श पा कर मेरे लंड से थोड़ा सा पानी निकल आया… Sasur bahu ki sex story कोमल – बाबुजीई…। (कहते हुवे अपने हाथ मेरी टांगो पे रख दिये और लंड को अपने मुँह में और अंदर जाने से रोक लिया)। मैं – ओह बहु…सॉरी (कहते हुवे अपने लंड को बहु के मुँह से निकाल लिया।)। लेकिन इतना सब होने के बाद मेरे अंदर इतना कण्ट्रोल नहीं था के मैं रुक पाता। लंड बहु के मुँह से बाहर आते हे फच-फच की आवाज के साथ ढेर सारा पानी मेरे लंड से निकल गया। मेरे लंड का पानी बहु के चेहरे गर्दन और शायद बूब्स पे गिरा और बाकी फर्श पे। बहु का चेहरा मेरे लंड के पानी से भीग गया था। मैंने अपने लंड को अंदर अपने लोवर में छिपा लिया। थोड़ी देर के लिए कमरे में सन्नाटा था। हम दोनो में से किसी ने कुछ नहीं कहा। बहु ने अपने आँचल से अपना चेहरा साफ़ किया और उठ के खड़ी हो गई। मैं भी बहु से बिना नज़रें मिलाये बिस्तर की तरफ बढ़ गया। बहु ने अँधेरे में फर्श पे गिरे मेरे माल को देखने की कोशिश की और फिर बगल के कमरे से एक कपडा लाकर फर्श पोंछने लगी। मैं वहीँ खड़ा बहु को देखता रहा बहु ने चुप्पी तोड़ने के लिए मुझसे रिक्वेस्ट की। कोमल – बाबूजी। ये चेयर हॉल में रख दीजिये ना प्लीज। मैं – अच्छा बहु। मैंने चेयर वापस हॉल में रख दी। (मैंने थोड़ी राहत की सांस ली, जो कुछ भी हुवा उसके रिएक्शन से साफ़ नज़र आ रहा था कि बहु को कोई फर्क नहीं पड़ा और अब वो नार्मल हो चुकी थी। रात को मैं बहु और शेर सिंह डिनर करने के बाद बिस्तर पे बैठे बातें कर रहे थे… शेर सिंह – लगता है आज सारी रात पावर नहीं आएगी, बहु को कैंडल की रौशनी में डिनर बनाने में काफी तकलीफ हुई होगी ना? कोमल – नहीं अंकल मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं हुई इस मोहल्ले में शाम को लाइट जाना तो आम बात है। मैं – हाँ शेर सिंह हमारे घर का पावर बैकअप भी ख़राब पड़ा है, कल मैं उसे बाजार में ठीक कराने की कोशिश करता हूँ, देखो अब तो सारे कैंडल भी खत्म हो जायेंगे। बहु और कैंडल हैं? कोमल – नहीं बाबूजी। और कैंडल नहीं हैं। शेर सिंह – (मुझे आँखों से इशारा करते हुवे। – शायद बहु बहुत ज़्यादा कैंडल यूस करती है। (शेर सिंह जानबूझ कर डबल मीनिंग में बातें की)। कोमल – हाँ अंकल मैं तो बहुत सारे कैंडल यूस करती हूँ… कैंडल भी पतले हैं तो ज्यादा देर तक नहीं चलते। मोटे होते तो अच्छा होता। मै – बहु तुम्हे मोटा कैंडल चाहिए तो मैं ला दूंगा। शेर सिंह – मेरा कैंडल बहुत मोटा है बहु तुम्हे चाहिए तो मैं दे दूंगा। मेरा मतलब मुझे घर से लाना होगा। शेर सिंह – वैसे बहु तुम कैंडल के अलावा और क्या-क्या यूस करती हो? (शेर सिंह फिर से गन्दी टॉक करते हुवे) कोमल – अंकल जी मैं। ज्यादा तो कैंडल ही यूस करती हूँ कभी कभी किचन में अपना मोबाइल भी यूस कर लेती हूँ। उसमे टोर्च है ना। शेर सिंह – बहु… तुम बाबूजी का मोबाइल क्यों नहीं यूस करती।? वो बड़ा भी है और उसकी रौशनी भी ज्यादा है। शेर सिंह – वैसे बहु तुम्हे मोबाइल से ज्यादा मज़ा आता है या कैंडल से?? मेरा मतलब आसान क्या है? शेर सिंह इस बार काफी खुल के डबल मीनिंग सवाल किया और मुझे लगा शायद बहु को भी समझ आने लगा के क्या ये डबल मीनिंग बातें हो रही हैं। लेकिन फिर भी बहु शायद जानबूझ कर बोली। कोमल – अंकल जी। मुझे तो कैंडल यूस करने में ज्यादा मज़ा आता है। बहु के मुँह से ऐसी बात सुन कर मेरा लंड खड़ा हो चुका था… मैंने भी अपनी तरफ से डबल मीनिंग जोड़ने की कोशिश की। मैं – बहु क्या तुम रात में भी कैंडल यूस करती हो…? कोमल – हाँ बाबूजी मै रात में मोटा कैंडल यूस करती हूँ ताकि देर तक चले। वरना मुझे अँधेरे में डर लगता है। मैं – कोई बात नहीं बहु आज तो मैं तुम्हारे साथ ही सोऊंगा तो आज तुम्हे किसी मोटे कैंडल की जरुरत नहीं पड़ेगी। Sasur ne bahu ko pela hindi sex story कुछ देर बात करने के बाद शेर सिंह सोने चला गया। मैं और बहु बैडरूम में आ गए। बैडरूम में आने के साथ ही बहु ने मेरी तरफ प्यासी नज़रों से देखते हुवे एक मादक अंगड़ाई ली। मैं अपनी नज़र बहु के चेहरे से हटा कर उसके बड़े बूब्स को देखने लगा। उसकी अंगड़ाई देख कर ऐसा लगता था मानो बहु की दोनों चूचियां ब्लाउज का बटन तोड़ के बाहर आ जाएँगी। बहु ने अपना पल्लू नीचे गिरा दिया और बोली। कोमल – बाबूजी आज कितनी गर्मी है कमरे में। मैं बहु की नाभि देखने लगा, पल्लू उतरने से उसका पेट पूरा नंगा हो चुका था और उसका गोरा पेट और कमर अंधेरे में भी चमक रहे थे। मैंने भी अपनी टीशर्ट उतारते हुवे कहा… मैं – हाँ बहु बहुत गर्मी है। बहु का नंगा पेट देखकर लोवर में मेरा लंड खड़ा था।)। कोमल – पता नहीं कब लाइट आएगी। (बहु ने अपने ब्लाउज के 3 बटन खोल दिए )। मैं – (मैं बहु की क्लीवेज को देखता रहा। उसकी चूचियां ब्रा के अंदर से बाहर निकल आयीं थी।) बहु। तुम साड़ी में बहुत अच्छी लगती हो। कोमल – सच बाबूजी। क्या अच्छा लगता है? मैं – सब कुछ बहु। तुम्हारी पसंद के कलर, तुम्हारा साड़ी पहनने का स्टाइल। तुम्हारी साड़ी में बॉडी सब कुछ अच्छा लगता है। कोमल – साड़ी पहनने का स्टाइल? कौन सा स्टाइल? मैं – वही बहु जो तुम साड़ी को नाभि के नीचे बांधती हो और टाइट भी। कोमल – हाँ बाबू जी मुझे साड़ी नाभि के नीचे पहनना अच्छा लगता है। राजेश भी मुझे हमेशा नाभि दिखाने को कहते हैं। मैं – बहु तुम्हारी नाभि बहुत ही अच्छी दिखती है। ऐसी नाभि तो किसी एक्ट्रेस की भी नहीं है बहु। कोमल – (अपनी साड़ी को नाभि के और नीचे करते हुवे। – बाबूजी। ऐसा क्या है मेरी नाभि में ? मैं – (बहु के पास जा कर अपने दोनों हाथों से उसकी नंगी कमर को पकड़ते हुवे।) बहु तुम्हारी नाभि कितनी डीप और बड़ी है। मुझे हमेशा से ऐसी नाभि पसंद थी। बहु जब तुम कॉलेज में होगी तब तुम्हारी नाभि के तो बहुत सारे दीवाने होंगे ना? कोमल – (हँसते हुवे। – होंगे बाबूजी मुझे नहीं मालूम। अभी तो मुझे इतना पता है के मेरी नाभि को मेरे पति और ससुर दोनों बहुत पसंद करते हैं। बहु अब अपनी साड़ी और ब्लाउज उतार चुकी थी। वो मेरे सामने सिर्फ ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थी। कोमल – बाबूजी मैं कपडे बदल लेती हूँ। आप भी चेंज कर लीजिये। बहु ने अपने पेटीकोट की डोर खींचते हुवे कहा।)। कोमल – ओह बाबूजी। ये पेटीकोट खुल नहीं रहा। ओह्हो। मैं – (बेड पे बैठे हुवे…) इधर आओ बहु मैं तुम्हारा पेटीकोट खोल देता हूँ। कोमल – जी बाबूजी (बहू मेरे करीब आ जाती है)। मैंने कुछ देर कोशिश की। मैं – अरे बहु लगता है गोल गांठ पड़ गई है ये नहीं खुलेगा। तुम ऐसे ही सो जाओ। सुबह खोल दूंगा। कोमल – नहीं बाबूजी मैं गर्मी से मर जाउंगी। आप प्लीज खोल दीजिये ना। मै – ठीक है बहु। मैं अपने दांतो से try करता हूँ। फिर मै बहू को अपने और पास खींच कर, बहु के पेटीकोट को अपने होठ और दांत से खोलने लगा। ऐसा करते वक़्त मैंने कई बार बहु की नाभि भी चाट ली। मैं – खुल गया बहु। मैंने बहु के पेटीकोट को नीचे गिरा दिया। फिर मैं बहु की नंगी जांघों को छूने लगा। मैं – बहु तुम सच ही कहती थी, तुम्हारी जांघो पे बिलकुल बाल नहीं हैं। (मैंने बहु की जांघों पे हाथ फिराते हुवे कहा)। कोमल – हाँ बाबुजीई… (बहु की आवाज़ थोड़ी बदली सी थी। जैसे उसे कुछ हो रहा हो)। मैं बहु की इनर जांघों को सहलाते हुवे उसकी चूत के काफी करीब ऊँगली लगा दी। मुझे वहां पे बहुत गीला सा लगा। बहु शायद वेट थी। मै – अरे बहु तुम्हे तो पसीना आ रहा है। कोमल – आआआहहह नहीं बाबूजी ये पसीना नहीं है। मैं – फिर क्या है बहु? कोमल – बाबूजी वो बस ऐसे ही कुछ नहीं छोड़िये ना। (बहु मेरा हाथ हटा कर बिस्तर पे एक पतली चादर के अंदर लेट गई)। मुझे महसूस हुवा के शायद बहु वेट हो गई है और वो पसीना नहीं बहु की बुर का पानी था। मैं बहु के बगल में उसी चादर में केवल लोवर पहने लेट गया। मैं – बहु क्या तुम ऐसे भीगी पैंटी पहन कर सो जाओगी? ऐसे तो तुम्हारे जांघों के बीच रेशेस आ जाएंगे। कोमल – ओह… बाबूजी क्या भीगी पैंटी पहनने से रेशेस हो जाती है।? मैं – हाँ बहु। और फिर स्किन डिजीज भी हो जाती हैं। कोमल – क्या सच में बाबूजी। एक बात कहूं बाबूजी मुझे वहां 2 दिन से इचिंग हो रही है। मुझे लगा के मैंने हेयर रिमूव किया इसलिए हो रही है। मैं – नहीं बहु रेशेस भी हो सकती है क्या तुम्हे 2 दिन से लगातार इचिंग हो रही है? कोमल – हाँ बाबूजी। मै – बहु जब तुम्हे रेशेस हो तो रात को सोते वक़्त सब उतार दिया करो। लड़कियों का बदन बहुत नाज़ुक होता है इसलिए रेशेस होना बहुत कॉमन हो जाता है। कोमल – मैं तो कपडे उतार के सोती हूँ। देखिये अभी भी मैंने बस ब्रा और पैंटी ही पहनी है। मैं – बहु मैं इनको भी उतारने को कह रहा हूँ। तुम्हे पूरी तरह से नंगी सोना चाहिए कुछ दिन। आज तो लाइट भी नहीं है गर्मी भी बहुत है और तुमने भीगी पैंटी पहनी है। तुम इन्हे भी उतार दो बहु। बहु ने मेरी बात सुन अपनी ब्रा उतार दी। और अपनी पैंटी हाथ में लेकर मुझे दिखाते हुवे बोली। कोमल – ये लीजिये बाबू जी मैंने अपनी पैंटी उतार दी। बहु की पैंटी हाथ में देख मैं पूरी तरह से excited हो गया। मैंने अपना लोवर और अंडरवियर खोल बिस्तर के नीचे गिरा दिया और एक हाथ से लंड को पकड़ सहलाने लगा। मैंने बहु के हाथ से पैंटी ले ली और उसकी गीली पैंटी को सूंघने लगा। Sasur bahu ki sex story कोमल – ये क्या कर रहे हैं बाबूजी? मैं – बहु तुम्हारी पैंटी से कुछ अजीब सी स्मेल आ रही है। कोमल – ओह बाबूजी फेंकिए ना उसे… (बहु ने अपनी पैंटी मेरे हाथ से लेकर नीचे फेंक दी और शीट के अंदर अपना चेहरा ढक ली)। कोमल – बाबू जी… ये शीट के अंदर कैसी स्मेल है? मुझे realize हुवा के मैंने लंड सहलाते-सहलाते अपने लंड का स्किन नीचे खोल दिया था और मेरे लंड की स्मेल फ़ैल गई थी। मैं – बहु वो मुझे गर्मी लग रही थी तो मैंने अपनी लोवर और अंडरवियर उतार दी है। कोमल – ओह्ह बाबूजी आपको भी ज्यादा गर्मी लग रही है? ठीक किया आपने न जाने कब तक लाइट आएगी। लेकिन ये स्मेल क्यों है? मैं – वो बहु…। जैसे तुम्हारे पैंटी से स्मेल आ रही थी न। वैसे ही जब मैंने अपनी अंडरवियर उतार दी तो आ रही है। ये देखो ठीक वैसी ही स्मेल मेरे हाथ से भी आ रही होगी, (मैंने अपना हाथ लंड से हटा कर बहु की तरफ बढ़ाया)। कोमल – (बहु मेरे हाथ को स्मेल करते हुवे। – हाँ बाबूजी। ये तो वैसे ही स्मेल है। लेकिन ये आपके हाथ से क्यों? इसका मतलब आप अपने हाथ से क्या कर रहे थे। मैं – अरे बहु वो मैंने जब अंडरवियर उतारा तो साथ में वो…आआ… मेरा मतलब… वो…। स्किन खुल गया और फिर हाथ लगाने से स्मेल मेरे हाथ में भी आ गई। कोमल – ओह बाबूजी। आपको दर्द तो नहीं हुवा।?? sasur aur bahu ki real chudai kahani मैं – नहीं बहु। मैं – बहु एक बात पूछूं? कोमल – हाँ बाबूजी पूछिये। मै – तुम्हारी पैंटी गीली क्यों थी। – और तुम्हारी पैंटी में स्मेल कैसी थी? कोमल – (शर्माते हुवे।) ओह पापा। वो ऐसा ही होता है। वहां नीचे स्मेल तो होती है न जैसे आपकी है। तो पैंटी में भी वही स्मेल थी। मैं – (बहु का जवाब सुनकर मैं तेज़ी से लंड हिलाने लगा और भारी सांस लेते हुवे फिर से पूछा।) क्या तुम नीचे अभी भी गीली हो।?? कोमल – (शर्माते हुवे – जी बाबूजी। मैं – क्या तुम्हारे नीचे ज्यादा पानी आ रहा है या कम? कोमल – जी बाबूजी ज्यादा आ रहा है। मैं – ओह्ह्ह बहु। अपना एक हाथ नीचे ले जाओ और अंदर से पानी पोंछ लो। कोमल – क्यों बाबूजी? मैं – बहुउउउउउउउउ जैसा मैं कह रहा हूँ करो। कोमल – ठीक है बाबूजी। (बहु अपना हाथ अपने बुर पे ले गई और 2 उँगलियों से पानी को साफ़ कर अपना हाथ बाहर ले आयी)। मैंने पहले बहु का हाथ पकड़ करीब से स्मेल किया और फिर उसकी बुर के पानी से चिपचिपी ऊँगली को मुँह में ले चाटने लगा। कोमल – आआह बाबूजी ये क्या कर रहे हैं?? मैं – बहु। मैं सोच रहा था के जब इसकी स्मेल इतनी अच्छी है तो इसे चाटने में कितना मज़ा आएगा। कोमल – बाबूजी। ये आप क्या कह रहे हैं। आपने मेरे… वहां के पानी को… ओहह! मै – हाँ बहु तुम्हारी बुर का पानी चाटने में बहुत मज़ा आ रहा है बहु। (मैंने बेशर्मी से बहु के बुर की बात कह डाली… बहु मेरे मुँह से बुर वर्ड सुन कर शॉक हो गई। और मेरा मुँह बंद करने के लिए उसने अपना हाथ मेरे मुँह पे रख दिया। लेकिन ये वही हाथ था जिससे बहु ने अपनी चूत में ऊँगली की थी। मैं पागलों की तरह बहु के हाथ चाटने लगा। बहु शर्मा गई।)। Sasur bahu ki sex story कोमल – बाबूजी। हमे साथ नहीं सोना चाहिए। ये आपको क्या हो रहा है। प्लीज रुक जाइये। मैं – मैं रुक जाऊंगा बहु बस एक बार मुझे अपनी गरम बुर (चूत) छूने दो। कोमल – नहीं बाबूजी। मैं – प्लीज बहु मैं जानता हूँ ये गलत है लेकिन मुझे बस एक बार अपनी गरम जवान बहु का बुर को छूना है। कोमल – नहीं बाबूजी। मैं नहीं कर सकती अगर आपको मेरे बुर का पानी पीना है तो मैं अपनी ऊँगली डाल के आपके मुँह में देती हूँ बस। ये ठीक है? बहु के मुँह से बुर वर्ड सुन मैं पागलों की तरह लंड हिलाने लगा। और बोला। मैं बहु को खुलता देख और गन्दी बातें करने लगा। मै – ठीक है बहु मैं नहीं छूऊँगा, लेकिन फिर तुम्हे मेरे लंड से पानी निकालना होगा। कोमल – मैं कैसे कर सकती हूँ बाबूजी।? मैं – देखो बहु झूट मत बोलो मुझे पता है तुम्हे भी मेरे लंड का स्मेल पसंद है और शाम को तो रूम साफ़ करते वक़्त मेरे लंड का पानी तुम्हारे चेहरे पे गिर गया था। कोमल – वो सब अचानक हुवा था बाबूजी। प्लीज मैं आपका लंड नहीं छूवूँगी। प्लीज आप मेरे ससुर हैं। मैं – ठीक है बहु फिर मैं तुम्हारे सामने मास्टरबेट करूँगा और शाम की तरह तुम्हारे चेहरे पे अपने लंड का पानी निकालूंगा। बोलो बहु। कोमल – ठीक है बाबूजी। लेकिन जल्दी कीजिये शेर सिंह अंकल क्या सोचेंगे? (मैं अपना लंड हाथ में लेकर बहु के पास बैठ गया, बहु की चूचि से चादर हटा दिया और बहु की बड़ी बड़ी चूचि और निप्पल देख मुट्ठ मारने लगा। मेरा लंड बहु के होठ के काफी करीब था और बहु बेशर्मी से कभी मुझे तो कभी मेरे लंड को देख रही थी)। थोड़ी देर बाद मेरे लंड से गाढ़ा सफ़ेद पानी बहु के होठ पे गिरा और फिर उसके पूरे चेहरे पे। आज मुझे अपनी ही बहु के मुँह पे मुठ मार कर बहुत सैटिस्फैक्शन मिला। बहु ने अपना मुँह पोंछा और बोली। कोमल – बाबूजी। आपने तो मेरा पूरा मुँह गन्दा कर दिया कितना सारा पानी निकला है आपका? मैं – हाँ बहु। तुम्हारी जैसी बहु हो तो किस ससुर का पानी नहीं निकलेगा। कोमल – मुस्कुराते हुवे बोली। आपको बहु पसंद है ना? लेकिन प्लीज वादा कीजिये आज के बाद आप ऐसा नहीं करेंगे। मैं – बहु को आँख मारते हुवे। ठीक है बहु। लेकिन अगर बहु का मन करे तो? कोमल – (हँसते हुवे। – नहीं होगा बहु कंट्रोल कर लेगी। बहु के मुँह पे अपना माल निकाल के मुझे काफी सैटिस्फैक्शन हुवा, मैं रिलैक्स होने के बाद वहीँ बहु के बगल में सो गया। बहु भी अपना मुँह पोंछ अपना पेटीकोट पहन मेरे बगल में लेट गई। सुबह जब मेरी नींद खुली तो बहु कमरे में नहीं थी शायद वो किचन में काम कर रही थी। मैं हाथ मुँह धोकर कमरे से बाहर आया हमेशा की तरह बाहर हॉल में शेर सिंह न्यूज़ पेपर पढ़ने के बहाने मेरी बहु के जिस्म की नुमाईश का जायजा ले रहा था। Sasur bahu ki sex story Sasur bahu ki real sex story मैं – गुड मॉर्निंग शेर सिंह आज सुबह-सुबह उठ गया तू। शेर सिंह – गुड मॉर्निंग! हाँ देसाई कल रात जल्द ही सो गया था इसलिए जल्दी उठ गया। मैं – कैसी रही नींद? शेर सिंह – अच्छी… तेरी बहु कोमल को याद कर थोड़ी देर जगा रहा रात में, फिर अपनी पिचकारी से बहु के नाम का सफ़ेद पानी निकाल कर सो गया। मैं – साला तू नहीं सुधरेगा। शेर सिंह – क्या करूँ मेरी किस्मत तेरी तरह तो नहीं ना, के बहु के कमरे में सो सकूँ। लेकिन देसाई जी नुक़्सान भी है आप बहु के कमरे में सोते हो, तो आप चाह के भी मुठ नहीं मार सकते है ना? मैं – छुपकर। (मैं मन सोचता हुवा के शेर सिंह तुझे क्या मालूम मैंने कल रात सिर्फ मुठ ही नही मारी बल्कि बहु के मुँह पे माल भी गिराया भी वो भी बहु के मर्ज़ी से। )। मैं – हाँ शेर सिंह ये प्रॉब्लम तो है। शेर सिंह – देसाई आज सुबह से मैं यहाँ बाहर बैठा हूँ लेकिन बहु पास नहीं आयी मेरे, वहीं किचन में काम कर रही है, बड़ा मन हो रहा है उसकी डीप नाभि और मोटी मोटी गांड देखने का। मै – चुप हो जा, बहु ने सुन लिया तो क्या सोचेगी। मै – चलो अब हम लोग मॉर्निंग वाक के लिए चलते हैं, मैं बहु को भी बुलाता हूँ। मैं – बहुउउउ…। कोमल – जी बाबूजी आयी। कोमल पहले से ही एक पिंक कलर का मिड ड्रेस पहनी हुई थी। उसकी गोरी और मोटी जांघें सुबह-सुबह हमे पागल बना रही थी। कोमल – बाबूजी मैं तैयार हूँ चलिये! कोमल, शेर सिंह और मैं मॉर्निंग वाक के लिए निकल पड़े। शेर सिंह और बहु मेरे आगे-आगे चल रहे थे और मैं पीछे बहु की गांड पे नज़र गड़ाए चल रहा था। मैं सोच रहा था के कल रात जो भी हुवा उसके बावजूद बहु कितने आराम से बातें कर रही है, जैसे मानो कुछ हुवा ही ना हो। क्या ये मेरी बहु है जिसके मुँह पे कल रात मैंने अपने लंड का पानी निकाला था। क्या मेरे बेटे ने कभी भी मेरी बहु के मुँह में अपना पानी छोड़ा होगा? मेरे अंदर काफी सारे सवाल आ रहे थे, मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था के मैं अपनी बहु के साथ इतना कुछ कर सकूंगा वो भी इतनी जल्दी। बीती रात की बात सोच मेरा लंड खड़ा हो गया और मैं जैसे तैसे वाक पूरा कर घर आ गया। दोपहर 1 बजे हम तीनो डाइनिंग टेबल पे बैठ कर लंच कर रहे थे। मेरी बगल में बहु वाइट कलर सलवार सूट पहन के बैठी थी और मेरे ठीक सामने दूसरी तरफ शेर सिंह। हम सब कुछ-कुछ बातें कर रहे थे, मैंने बातो ही बातों में अपना एक हाथ बहु की जांघो पे रख दिया। बहु ने तुरंत मेरा हाथ हटा दिया, मैंने फिर से बहु की जांघ पे हाथ रख दिया और सहलाने लगा। इस बार बहु चुपचाप थी और अपनी नज़र झुकाये लंच करती रही। Sasur bahu xxx story hindi मैं – बहु जरा रोटी देना एक और। (ऐसा कहते हुवे मैं अपना हाथ बहु की बुर के पास ले गया और जोर से दबा दिया )। कोमल – ये लीजिये बाबू जी। (बहु ने एक नज़र शेर सिंह को देखा)। मैं – डबल मीनिंग में वाह बहु… तुम्हारी रोटी कितनी गरम और फूली हुई है। (मैंने बहु की बुर वाइट सलवार के ऊपर से सहलाते हुवे कहा।) बहु मेरा इशारा समझ रही थी, के मैं रोटी की नहीं उसकी फूली हुई और गरम बुर की बात कर रहा हूँ। कोमल – हाँ बाबूजी बहुत गरम है। शेर सिंह – हाँ बहु तुम रोटी बहुत अच्छी बनाती हो। लेकिन बहु तुम इतना घी क्यों लगाती हो रोटी में। मैं – डबल मीनिंग, शेर सिंह बहु की रोटी का घी है तो टेस्टी ही ही होगा। मुझे तो बहु की रोटी से निकलता हुवा घी बहुत पसंद है। बहु की रोटी में जितना घी उतना मज़ा। मैं – (एक हाथ से रोटी को उठाते हुवे। देखो बहु कितना सारा घी निकल रहा है। (ऐसा कहते हुवे मैंने बहु के बुर के बीच अपनी ऊँगली घुसा दी।) क्यों बहु घी निकल रहा है ?? कोमल – हाँ बाबूजी बहुत ज्यादा घी निकल रहा है मेरी रोटी से। अब खा भी लीजिये। देखिये न आपकी पूरी ऊँगली वेट हो गई मेरे घी से। मैं – (अपनी ऊँगली चाटते हुवे।) बहु तुम तो जानती हो मुझे चाटना अच्छा लगता है। (इस बार मैंने अपना दूसरा हाथ बहु की बुर से हटा कर अपनी जीभ से चाट लिया)। शेर सिंह – (हँसते हुवे…।) देसाई तुम्हारे इस हाथ में घी लगा है और तुम दूसरा हाथ चाट रहे हो ?? मैं – अरे शेर सिंह तुम नहीं जानते इस हाथ में भी बहु की रोटी का घी लगा है, इसकी स्मेल भी अच्छी है और चाटने में स्वाद भी। इतना सब डबल मीनिंग बात कर मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था, मैंने बेशर्मी से टेबल के नीचे बहु के सामने ही अपना लंड बाहर निकाल लिया और रब करने लगा। बहु चोरी से अपनी तिरछी नज़र से मेरे लंड का स्किन ऊपर नीचे जाते देख रही थी। दूसरी तरफ बैठा शेर सिंह इन सब हरकतों से अनजान था। Sasur bahu ki sex story मैं – (मुठ मारते हुवे। – बहु क्या हुवा तुम ठीक से खा नहीं रही। ? कोमल – कुछ भी तो नहीं बाबूजी मैं खा तो रही हूँ। मैं – नहीं बहु लगता है तुमने सारी घी वाली रोटियां मुझे और शेर सिंह को दे दी और खुद सूखी रोटी खा रही हो। शेर सिंह – बहु ये गलत है तुम मेरी ये घी वाली रोटी ले लो और मुझे सूखी वाली दे दो। मैं चेयर पे बैठा मुठ मार रहा था और 5-6 बार स्ट्रोक मारते ही मेरे लंड का पानी मेरी हथेली पे ही निकल आया। बहु ने मेरा माल निकलते हुवे देख लिया, लेकिन वहां शेर सिंह के होने की वजह से कुछ नहीं बोल पायी और चुपचाप खाना खाती रही। मैं – बहु… ला रोटी इधर दे। मेरे हाथ में घी लगी है मैं लगा देता हूँ। (बहु ने कोई रेस्पोंस नहीं दिया )। मैं – (अपना हाथ आगे बढ़ाते हुवे बहु की रोटी उठा ली और उसपे अपनी हथेली का सारा माल फैला दिया) ये लो बहु। थोड़ा मेरा भी घी का स्वाद चख लो। कोमल – जी बाबूजी। (कोमल ने मेरे सफ़ेद माल से भीगी रोटी को तोड़ अपने मुँह में डाल लिया)। मैं – कैसी लगी बहु।? कोमल – अच्छी है बाबूजी। बहुत अच्छी। बहु की इस हरकत को देख मैं काफी एकसाईटेड हो गया। मेरी रंडी बहु कितनी बेशर्मी से मेरे माल से भरी रोटी खा रही थी। हम सब लंच खत्म करने के बाद काफी देर तक वहीँ बैठे बातें करते रहे। शेर सिंह – बहु तुम्हारे हस्बैंड कब आएंगे? रोज बात होती है? कोमल – हाँ अंकल बात तो होती है कुछ महीनो में आ जायेंगे। शेर सिंह – तुम सारा दिन बोर नहीं हो जाती? कोमल – हो जाती हूँ लेकिन फिर हस्बैंड से कभी फ़ोन पे तो कभी वेबकेम पे बात कर लेती हूँ। शेर सिंह – अच्छा तो तुम इंटरनेट भी यूस करती हो ? कोमल – जी अंकल! शेर सिंह – अरे वाह। ये तो अच्छी बात है। आजकल तो सबलोग फेसबुक पे भी बातें और फोटो अपलोड करते हैं ना! तुम्हारे फोटोज हैं फेसबुक पे? कोमल – जी मैं फेसबुक यूस करती हूँ फोटो तो पुराने शादी के हैं। उसके बाद कोई नयी फोटो नहीं है। शेर सिंह – क्यों बहु?? तुम और राजेश मिलते नहीं हो, तो कम से कम उसे अपनी लेटेस्ट फोटो तो भेज दिया करो। कोमल – अंकल वक़्त ही कहाँ मिलता है और काफी दिनों से कहीं गई भी तो नहीं। शेर सिंह – तो क्या हुवा बहु हमारे घर के पीछे अच्छी जगह है, तुम्हे कहीं जाना भी नहीं पड़ेगा। लाओ मैं तुम्हारी कुछ अच्छी फोटो निकाल देता हूँ। मैं – हाँ बहु मैं कैमरा लाता हूँ तुम ये सलवार सूट उतार कर साड़ी पहन लो और 2-3 ड्रेस और भी निकाल लाना, ढेर सारी फोटो खींच लेते हैं तुम्हारी। कोमल – जी बाबूजी। ससुर बहु की सच्ची चुदाई कहानी मैं शेर सिंह और बहु घर के पीछे चले गए। शेर सिंह कैमरा पकडे खड़ा था और बहु उसके सामने खड़ी हो गई। मैंने नोटिस किया के शायद बहु ने अपनी साड़ी और नीचे कर दी है और अपना पूरा पेट और नाभि हमे बेशर्मी से दिखा रही है। शेर सिंह ने बहु के कई फोटो खींचे, बहू भी शर्म छोड़ अपनी जिस्म की नुमाईश करती रही और कई पोज़ में तो वो मुझे बिलकुल रंडी नज़र आ रही थी। कुछ फोटो के बाद बहु ने 2-3 साड़ी और चेंज की और हर फोटो में उसकी नाभि पूरी खुली ही दिखी। किसी भी फोटो में बहु ने अपनी नाभि छुपाने की जरुरत नहीं समझी। शाम को डिनर करने के बाद शेर सिंह अपने कमरे में चला गया। मैं और बहु एक कमरे में आ गए। बहु ने दरवाज़ा बंद किया और विंडो पे कर्टेन लगा दिया। मैं बिस्तर पे बैठ ब्लैंकेट में घुस गया और बहु को देखने लगा, बहु मेरे सामने कपडे चेंज करने लगी। और मेरे सामने एक टीशर्ट और शार्ट में बिस्तर पे चढ़ गई। Sasur bahu ki sex story मैं – बहु तुम इतनी चुप क्यों हो? मुझसे नाराज़ हो? कोमल – हाँ बाबूजी कल रात मैंने आपको बोला था के आप मेरे साथ ऐसी हरकत दुबारा नहीं करेंगे। मै – हाँ बहु बोला था। कोमल – फिर क्यों? आपको दोपहर में लंच टेबल पे क्या हो गया था?? वो भी शेर सिंह अंकल के सामने? मैं – देखो बहु! मैं माफ़ी चाहता हूँ लेकिन उस वक़्त मैं अपने आप को रोक नहीं पाया, तुम बहुत खूबसूरत लग रही थी। कोमल – बाबूजी अगर शेर सिंह अंकल को पता चल जाता तो? आप बिना किसी डर के मेरे सामने। वो अपना… पानी… मेरी रोटी पे घी कह के लगा दिया। और मुझे मजबूरन खाना पड़ा। मैं – बहु मैं अपने होश खो बैठा था मुझे माफ़ कर दो। तुम्हे देख कर तो कोई भी अपना होश खो बैठे। कोमल – नहीं बाबूजी केवल आप। आपको प्रॉब्लम है आपको क्यों कण्ट्रोल नहीं होता…? मैं – देखो बेटा मैं जानता हूँ। लेकिन तुम भी तो वेट हो गई थी है न। ?? कोमल – (अपना सर झुकाते हुवे।) नहीं मैं वेट नहीं हुई थी। मै – झूठ। झूठ! कोमल – हाँ थोड़ा सा लेकिन वो आपकी वजह से। प्लीज ऐसा मत करिये। मैं – बहु मैं कण्ट्रोल नहीं कर पाता, मैं तो क्या कोई भी नहीं कर पायेगा, तुम्हारे जैसी भरे बदन वाली बहु को देख कर। कोमल – बाबू जी मैं आपकी बहु हूँ, मत करिये मेरे साथ ऐसा। आप शेर सिंह के साथ कमरे में सो जाइये प्लीज। मैं – बहु शेर सिंह ने तो मेरा रूम गन्दा कर दिया है और उसे प्राइवेसी चाहिए। कोमल – मैं समझी नहीं। गन्दा कर दिया है? कैसी प्राइवेसी? मै – जाने दो बहु तुम नहीं जानती। कोमल – बताइए न प्लीज बाबूजी! मै – देखो बहु शेर सिंह भी एक आदमी है और हर आदमी की एक जरूरत होती है उसे वो रात मे पूरी करना चाहता है। किसी के साथ या फिर अकेले। कोमल – कैसी जरुरत बाबूजी? मैं – मास्टरबेट करने की। कोमल – ये क्या कह रहे हैं आप? मैं – हाँ बहु हर कोई करता है ये तो नार्मल है। शेर सिंह भी वो भी तुम्हारे बारे में सोच कर! कोमल – मेरे बारे में – क्या? मैं – तुम्हारे स्ट्रक्चर और ख़ास कर तुम्हारी गांड के बारे में सोच वो मास्टरबेट करता है। कोमल – लेकिन आपको कैसे पता? मैं – मैंने 2 दिन पहले उसे अपने एक दोस्त के साथ फ़ोन पे बातें करते हुवे सुना। वो कह रहा था के देसाई जी की बहु बहुत सेक्सी है और वो तुम्हारे बारे में सोच कर मुट्ठ मारता है। (मैने बहु से झूठ बोला।)। कोमल – ओह बाबूजी मुझे तो यकीन नहीं होता के शेर सिंह अंकल। मैं – हाँ बहु कल दोपहर में मैंने उसे मास्टरबेट करते हुवे देखा भी। कोमल – क्या कर रहे थे शेर सिंह अंकल? मैं – दोपहर को शेर सिंह अपने कमरे में बैठा, फोटो में तुम्हारी नाभि देख मास्टरबेट कर रहा था। ससुर बहु की सेक्स स्टोरी हिंदी मै धीरे-धीरे बहु के पास आ गया और उसके कंधे पे हाथ रख उससे समझाने लगा। देखो बहु ये सभी आदमियों के लिए नार्मल है। मास्टरबेसन केवल सेक्सुअल सटिस्फैक्शन के लिए होता है। सभी पुरुष करते हैं क्या तुमने कभी नहीं देखा? कभी अपने मायके में? तुम्हारे भाई, चाचा या पापा किसी ने? तुम अपने घर में कभी भाई या पापा के बैडरूम में गई? कभी देखा बेडशीट पे कुछ गीला या दाग कुछ भी। कोमल – हाँ घर में कई बार कुछ अजीब सी चीज़ें होती थी, लेकिन मुझे ये सब कभी समझ में नही आया। कोमल की बात सुनकर मेरे लंड में थोड़ी सी हलचल हुई और मैंने उसे और डिटेल में बताने को कहा। मैं – बहु। क्या थी वो अजीब सी चीज़ें बताओ मुझे। कोमल – वो शादी से कुछ दिन पहले की बात है, मेरी मम्मी और मेरा भाई गाँव पर एक शादी के लिए गए थे। और घर में, मैं और पापा अकेले थे। मैं – फिर क्या हुवा।? कोमल – मैं जब एक सुबह पापा का रूम साफ़ कर रही थी, तो मुझे उनके पिलो के नीचे मेरी पैंटी मिली। मैंने सोचा शायद मम्मी ने गलती से मेरी पैंटी रख दी हो। लेकिन फिर मुझे याद आया के ये पैंटी 1 दिन पहले की मेरी यूस की हुई पैंटी है और मैंने बाथरूम में इसे धुले बगैर छोड़ दिया था फिर यहाँ कैसे पहुंची।? और मम्मी तो गाँव में हैं तो क्या पापा, मम्मी की पैंटी समझ कर मेरी पैंटी अपने कमरे में ले आये? मैं – उसके बाद? कोमल – फिर मुझे कुछ समझ में नहीं आया, दूसरे दिन भी मेरी पैंटी पापा के पिलो के नीचे पड़ी थी और उसमे कुछ गीला गीला सा था। कोमल – तो क्या मेरे पापा…। मैं – हाँ इसका मतलब तुम्हारे पापा तुम्हारी पैंटी रात में लाते थे और तुम्हारी यूस की हुई पैंटी का स्मेल लेते थे। और फिर तुम्हे उस पैंटी में इमेजीन कर मुट्ठ मारते थे। और फिर माल तुम्हारी पैंटी में ही गिरा दिया करते थे। कोमल – नहीं मैं नहीं मानती, मेरे पापा मेरे बारे में सोच कर। ये सब? मैं – हाँ बहु इसमें गलत नहीं है ये तो हर पुरुष का नेचर है, वो तो बस तुम्हारी बड़ी-बड़ी चूचि और फूली हुई बुर के बारे में इमेजिन कर अपने आप को सेक्सुअली सेटीसफ़ाई करते होंगे। मैं – क्या तुमने कभी उनका खड़ा लंड देखा था? कोमल – हाँ देखा था। मै – कब? कोमल – वो एक बार बाथरूम में मैंने उन्हें देखा था वो अपनी अंडरवियर उतार अपना लंड हाथ में लिए खड़े थे। सामने एक बड़ा सा मिरर था जिसके रिफ्लेक्शन में मैंने उनका बड़ा सा लंड साफ़ साफ़ देखा। वो अपने लंड के स्किन को नीचे किये हुवे थे, मैंने देखा तो मेरी धड़कन तेज़ हो गई और मैं भाग कर किचन में आ गई। (बहु बिना शर्म अपने मुँह से अपने पापा के लंड के बारे में बोल रही थी। मेरी रंडी बहु के मुँह से ये सब सुन कर मेरा लंड खड़ा हो गया और मैंने अपना लोवर नीचे कर ब्लैंकेट के अंदर लंड निकाल सहलाने लगा)। Sasur bahu ki sex story मैं – तो इसका मतलब तुमने सबसे पहला लंड अपने पापा का देखा? कोमल – (शर्माते हुवे।) हां! मैं – वाओ। अपने पापा का लंड देख क्या तुम्हारे बुर में पानी आया था? कोमल – बाबूजी ये आप क्या कह रहे हैं वो मेरे पापा हैं। मैं – मैं नहीं मानता सच सच बताओ बहु, अपने पापा के बारे में जानकर क्या अभी तुम्हारे बुर में पानी नहीं आ रहा? कोमल – बाबूजी ये आप क्या कह रहे हैं? मैं – सच कह रहा हूँ बहु क्या तुम अभी वेट नहीं हो? अपनी ऊँगली डाल के देखो! कोमल – नहीं मैं वेट नहीं हूँ। मैं – अगर नहीं हो तो अपनी ऊँगली अपनी बुर में डाल के दिखाओ। कोमल – (छुपाते हुवे अपनी गीली पैंटी हटाती है अपनी एक ऊँगली बुर में डाल बाहर निकालती है) कोमल – (झिझकते हुवे…। – ओह बाबूजी चलिए अब सोते हैं। मैं – नहीं बहु पहले तुम अपनी ऊँगली दिखाओ। कोमल – (अपनी नज़र झुकाये अपने हाथ दिखाती है। उसकी 2 उँगलियाँ बुर के पानी से पूरी तरह गीली होकर चमक रही थी। मै – (मैंने वो दो ऊँगली अपने मुँह में ले ली) देखा बहु तुम्हारे बुर से कितना पानी निकल रहा है (मैं तेज़ी से ब्लैंकेट के अंदर मुट्ठ मारने लगा)। कोमल – बाबूजी ये आप क्या कर रहे हो? मैं – मुठ मार रहा हूँ बहु… कोमल – प्लीज बाबूजी ये मत करिये प्लीज प्लीज प्लीज… Sasur ne bahu ko choda मैं – (मैंने अपना लंड बाहर निकाल बहु को दिखा दिया – नहीं बहु तुमने जब बताया के तुम्हारे पापा तुम्हारी पैंटी में मुठ मारे थे, तबसे मैं और ज्यादा excited हो गया हूँ। ओह बहु। मेरा लंड छूओ बहु। (मैंने बहु का हाथ अपने लंड पे रख दिया)। कोमल – (हाथ हटाते हुवे।) – नहीं बाबूजी! मै – बहु… बहु। मेरा पानी निकाल दो बहु। (तभी बगल में शेर सिंह के कमरे से कुछ आवाज़ आयी।) कोमल – शहहहहह… बाबूजी। शायद शेर सिंह अंकल जगे हैं। आप प्लीज रुक जाइये। मैं – नहीं बहु मैं नहीं रुक सकता। कोमल – तो फिर जल्दी निकाल दीजिये बाबूजी। जल्दी। अंकल आ गए तो। मैं – बहु इतनी जल्दी नहीं निकलेगा तुम कुछ करो। कोमल – क्या करूँ बाबूजी आपका माल जल्दी निकालने के लिए? मैं – तुम अपनी ब्रा खोल दो बहु शायद तुम्हारी चूचि देख के मेरा माल निकल जाए… कोमल – ओके बाबूजी। जल्दी करिये। (कोमल ने अपनी ब्रा उतार दी और अपनी नंगी चूचि मुझे दिखाने लगी। मैं बहु की चूचि देख मास्टरबेट करता रहा)। मैं – ओह बहु… तुम अपनी पैंटी उतार दो, मेरे लंड का पानी नहीं निकल रहा। कोमल – ओके बाबूजी। जल्दी करिये प्लीज।(बहु ने अपनी पैंटी उतार अपनी बुर मेरे सामने खोल दी। उसकी बुर से रस टपक रहा था और पूरी गीली हो चुकी थी)। मैं – ओह बहु। तुम्हारी बुर से कितना जूस निकल रहा है क्या मैं चाट लूँ? कोमल – (बिस्तर पे लेटे हुवे। अपनी टाँगे फैलाई – नहीं बाबूजी। मैं – प्लीज बहु। (मैं बिना देरी किये बहु की बुर चाटने लगा। बहु के मुँह से सिसकारी निकल गई और वो ओह आह उह चिल्लाने लगी। )। कोमल – बाबूजी ये आप क्या कर रहे हैं। प्लीज। इतना शोर सुनकर शेर सिंह अंकल को पता चल जायेगा। प्लीज जल्दी निकालिये। मैं – बहु। अगर जल्दी निकालना है तो तुम मेरा लंड अपने मुँह में ले कर चूसो और मैं तुम्हारे मुँह में मुठ निकाल देता हूँ। कोमल – मुँह में नहीं बाबूजी। मैंने तो अपने पति का लंड भी कभी मुँह में नहीं लिया। मैं – तो क्या हुवा बहु, पति का नहीं तो ससुर का ही लंड मुँह में ले लो। मेरा लंड चूस कर तुम एक अच्छी बहु बनोगी। कोमल – ठीक है बाबूजी। लाईये मैं आपका लंड चूसती हूँ (बहु ने होठ खोल मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और कसके चूसने लगी। )। मैं – आह बहु। बहुत मज़ा आ रहा है (बहु के गीले गरम होठो के अंदर मेरे लंड का बुरा हाल था। मेरी बहु मुझे ब्लोजॉब दे रही थी। – मैं इस बार कण्ट्रोल नहीं कर पाया और फव्वारे की तरह बहु के मुँह के अंदर मेरे माल का सैलाब छोड़ दिया। मेरा माल इतना ज्यादा था के बहु के होंठों के किनारे से बह कर बिस्तर पे गिरने लगा। फिर भी मेरी बहु मेरा लंड चूसती रही। शायद उसे मेरा लंड चूसने में मज़ा आ रहा था। लेकिन वो रंडी की तरह, जिस तरह मेरा लंड कसके चूस रही थी उससे मुझे ऐसा लगा जैसे वो शायद पहले भी कई बार लंड चूस चुकी है। लेकिन अभी ये बताना मुश्किल था के किसका?? सुबह देर तक मैं और बहु एक बिस्तर पे एक चादर के अंदर सोते रहे, मुझे ख्याल ही नहीं आया के कब शेर सिंह हमारे कमरे में आया और मुझे आवाज़ लगाने लगा। Sasur bahu ki sex story शेर सिंह- देसाई जी। देसाई जी। बहु। बहु। दिन चढ़ गया है मॉर्निंग वाक पे नहीं जाना। मैं घबरा कर उठ गया मुझे आश्चर्य हुवा के ये शेर सिंह कबसे हमे उठा रहा है। कमरे की हालत बहुत ख़राब थी… बहु की ब्रा और पैंटी बिस्तर के नीचे गिरी पड़ी थी और मैं भी पूरा नंगा था। मैं डर गया के शेर सिंह न जाने क्या सोच रहा होगा हमारे बारे में। मैंने चुपके से चादर खींच के बहु की नंगी पीठ को ढक दिया और खुद भी लेटा रहा। मैं – शेर सिंह वो मेरे सर में दर्द है तो मैं वाक पे नहीं जाऊंगा। तुम चले जाओ। शेर सिंह – और बहु क्या बहु नहीं आएगी।? मैं – बहु देर रात तक राजेश से बात कर रही थी तो अभी शायद नहीं उठेगी, तुम चलो मैं पूछता हूँ। शेर सिंह – ठीक है (और शेर सिंह कमरे से बाहर चला गया)। कोमल – (उठ के बैठती हुई।) बाबूजी………।शेर सिंह अंकल ने सब देख लिया??????? शिट। मैं क्या मुँह दिखाउंगी।? ओह्ह। मैं – (ओह इसका मतलब बहु जानबूझ कर सोने की एक्टिंग कर रही थी उसे पता था के वो बिस्तर से बाहर नहीं निकल सकती)… नहीं नहीं बहु उसे पता नहीं चला होगा के चादर के अंदर तुम नंगी हो। तुम चिंता मत करो। कोमल- सच में बाबूजी? मैं – हाँ! कोमल – बाबूजी मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा ये सब क्या हो रहा है क्यों हो रहा है प्लीज बाबूजी आप रात को इतना बहक जाते हैं, मैं आपको कण्ट्रोल नहीं कर पाती, आखिर आपको हुवा क्या है, क्यों मेरी ज़िन्दगी बर्बाद कर देना चाहते हैं? मैं – नहीं बहु। ऐसा मत बोलो मैं तुम्हे कभी बदनाम नहीं होने दूंगा। मैं कल रात कुछ ज्यादा ही जिद्दी हो गया था मुझे माफ़ कर दो बहु। कोमल – ठीक है बाबूजी। लेकिन मैं अपने आप को और प्रॉब्लम में नहीं डाल सकती। आप प्लीज शेर सिंह अंकल को अपने घर जाने के लिए कह दीजिये, वो यहाँ क्यों रुके हुवे हैं? मैं – बहु। शेर सिंह तुम्हारे जिस्म की ख़ूबसूरती पाने के लिए रुका हुवा है मैं क्या बहाना करके उसे अपने घर भेजूं? कोमल – आप मर्दो का क्या प्रॉब्लम है? क्या मिलता है आपको? क्या वो आपके… आपके… वो। केले का पानी निकलने से सब ठीक हो जाता है? मैं – हाँ बहु हम मर्दो के लंड का पानी एक बार निकल जाए तो रिलैक्स महसूस होता है। एक बात कहूं, बहु अगर तुम बुरा न मानो तो। कोमल – क्या बाबूजी? मैं – तुम चाहती हो न के शेर सिंह अपने घर चला जाए? कोमल – हां! मैं – तो फिर तुम उसे सेटीसफ़ाई क्यों नहीं कर देती? कोमल – मैं समझी नहीं बाबू जी? मैं – मेरा मतलब। तुम कुछ ऐसा करो के वो सेटीसफ़ाई हो जाए वो तुम्हे बहुत पसंद करता है, तुम्हारे बारे में सोच कर मास्टरबेट करता है। और अगर तुम उसे हेल्प करोगी तो वो खुश हो कर अपने घर चला जाएगा। कोमल – बाबूजी मैं ये नहीं कर सकती। ये आप क्या कह रहे हैं? मैं – देखो बहु तुम अनजाने में कुछ ऐसा करो के वो मास्टरबेट करने पे मजबूर हो जाए। और वो जब सेटीसफ़ाई हो जायेगा तो खुद ही चला जाएगा। कोमल – लेकिन ये होगा कैसे? के मैं भी अनजान रहूं और शेर सिंह अंकल को मज़ा भी आ जाए? मैं कुछ सोचती हूँ। मैं – ठीक है बहु। कहानी आगे भी जारी रहेगी, कहानी पसंद आ रही हो तो नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं।

Frequently Asked Questions

कहानी 'पति बाहर ससुर का लंड बहू के अंदर – 2' का मुख्य विषय क्या है?
यह कहानी मुख्य रूप से शादी, कॉलेज, कहानी, रात, बाहर, ससुर, अंदर जैसे विषयों पर आधारित है, जो मानवीय भावनाओं और प्रेम संबंधों की गहराई को दर्शाती है।
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